गुरुवार, 24 मार्च 2016

धूप बनके वो मुझमे समाते रहे .....


होली की रंगभरी शुभकामनाएं !!!

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 बर्फ के कितने तूफान आते रहे
 धूप बनके वो मुझमे समाते रहे ।

 चाँद पूनम से तुम चमचमाते  रहे
 चाँदनी में तेरी हम नहाते रहे ।

 दिल्ली
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मंगलवार, 21 जुलाई 2015

मामला खेतों का है ...



रोज हंगामें में संसद,
 मामला खेतों का है ।
 पी गये है सारा दरिया,
 अब नजर रेतों पर है ।


 यह ठगों की मंडली,
 केवल तमाशा कर रही ।
 कोई ललितों का सिपाही,
 कोई कोलगेटों से है ।


 खेत में होरी बिचारा ,
 सोच कर हैरान है ।
 मुफलिसी चिर सहचरी,
क्या इतना मज़ा खेतों में है ?


 मुल्क की मेरे सियासत,
 क्या अच्छे दिन ले आई है ?
 बाप से ज्यादा अकल,
 मखमली बेटो में है ।


 दिल्ली
21 जुलाई 2015

सोमवार, 27 अप्रैल 2015

जब से तेरे शहर आने -जाने लगे ..


दर्द को गीत सा गुनगुनाने लगे,
 जब से तेरे शहर आने -जाने लगे ।
 उम्र भर जिनसे मेरी अदावत रही,
 अब उन्हे देखकर मुस्कुराने लगे ।

शुक्रवार, 28 नवंबर 2014

हमारी जिन्दगी तो बस तेरी यादें बनाती हैं ....



तुम्ही हो ख्वाहिशे मेरी,तुम्ही से ख्वाब बनते हैं ,
तुम्हारे एक ईशारे पर ,हमारे ताज बनते हैं  ।
सितारे लाख मेरे साथ रहते रातभर फिर भी,
तुम्हारी रोशनी से ही तो हम महताब बनते हैं  ।


अपने घर में हम अक्सर बेघर हो ही जाते हैं ।
जहाँ बिछड़े थे हम उनसे वहीं फिर लौट आते हैं ।
भटक पाऊँ ना भूले से कभी भी राह से तेरी,
ये सारे मील के पत्थर तेरा रस्ता बताते हैं  ।


तेरी यादों का मौसम रोज ये आँखे बताती हैं,
दहकती हैं ,बरसती हैं,बसन्ती गुल खिलाती हैं ।
कोई मंजर सुहाना रास ना आता इन आँखों को,
हमारी जिन्दगी तो बस तेरी यादें बनाती हैं  ।




दिल्ली
28 नवम्बर 2014

★★★★★
सफल,सुखद एवं भव्य जीवन की कामनाओं सहित जन्मदिन मुबारक ! @ संदीप शालीन

मंगलवार, 23 सितंबर 2014

चाँद मेरा है अकेला ...



 चॉद मेरा है अकेला
चाँदनी का भव्य मेला,
खो न जाए वो कहीं
ढूँढता उसको सवेरा  ।


रात से रंजिश हुई
क्या खाक सबकुछ हो गया ?
क्या कहूँ तारों से जाकर
चाँद मेरा खो गया ?


वो तिमिर की मौन गाथा
रात से जब तुम मिले ,
चाँदनी खामोश थी
 और फूल बनके तुम खिले ।


निशा के आगोश में जब 
रूप रश्मि तर उठी, 
चाँद चंचल हो मेरा
हा ! हो न जाए वो हठी  ।


वेदना इस विरह की
व्यग्र मन होता अधीर,
 चछु चकवी हो गये
आँसू की फैली लकीर  ।


लोग मेरे आँसुओं से
अब है कतराने लगे,
शरद ऋतु ,खंजन नयन
बस तुम याद आने लगे ।


याद क्या आते नही
तारों ने जो गाये थे गीत?
जूही का निखरा रूप-यौवन
पपीहा और चातक की प्रीति ।


विस्मरण का अवसाद क्या
इतना सघन है छा गया?
या चाँद मेरा रात से
ज्यादा अँधेरा पा गया?


एक तेरे खैर की 
ख्वाहिश मेरी अब रह गयी,
ख्वाब क्या आँखे ऊनीदी
रेत सी सब ढह गयी ।


क्या कहूँ, क्या करूँ?
सारा दिवस तपता रहा 
प्रारब्ध से अवसान तक
राहें तेरी तकता रहा ।


क्या विरह की यह घड़ी 
रात की कोई बला?
रात ही अनजान थी
वो चाँद की अपनी कला ।



अतीत के पन्नो से .....










शनिवार, 29 मार्च 2014

तूं हक़ीक़त है कोई ख्वाब नहीं



: २९ मार्च की  मधुर स्मृतियों को समर्पित  :



कितना आसां है ये कहना कि जी लेंगे तेरे बिन 
कितना मुश्किल है जीना, तेरे बिन एक-एक दिन ।

नशा-ए -अश्क पिया है, कोई शराब नहीं 
तूं  हक़ीक़त है, कोई ख्वाब नहीं ।

जिया है मैंने जिसे रोज, तदवीर कि तरह 
कैसे कह दूँ मेरे नहीं वो अब, तक़दीर कि तरह ।

अपनी दुनियाँ में ज़माने का कोई काम  न था 
अब ज़माने में उस दुनियाँ का कोई नाम न था।    


दिल्ली 
२९ मार्च २०१४ 


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शुक्रवार, 14 फ़रवरी 2014

गीत यादों के तेरी सुनाता रहूँ .....

बसन्तोत्सव  /मदनोत्सव पर सप्रेम : - 












 जिन्दगी महफिलों सी गुजर जायेगी,
 गीत यादों के तेरी सुनाता रहूँ।
 तुम गज़ल की तरह यूँ ही ढलती रहो,
 ऊम्र भर मैं तुम्हें गुनगुनाता रहूँ।


ख्वाहिशों की नदी बनके बहती रहो,
 मैं तमन्ना की नौका चलाता रहूँ ।
 तुम घटाओं सी उड़ती, बरसती रहो,
 प्यासे दरिया सा तुमको बुलाता रहूँ।


  वो खनकती हँसी, वो हया ओढ़नी,
 आईना बनके तुमको सजाता रहूँ।
 चाँद सा रूख तेरा, चाँदनी सी अदा,
 रात चकवी सा मैं भी बिताता रहूँ।


 गाँव से दूर अपने, शहर में तेरे,
 रोज किस्मत यूँ ही आजमाता रहूँ।
 घर नही है मेरा तो कोई गम नही,
 बस गली में तेरी आता - जाता रहूँ।


 तुम समाती रहो लेखनी में मेरे,
 कोरे कागज को अमृत पिलाता रहूँ।
 आरज़ू है मेरी, हे! मेरी मानवी,
 बनके शालीन बस तुमको गाता रहूँ।


 
 दिल्ली
10 फरवरी 2014


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शुक्रवार, 29 नवंबर 2013

जन्मदिन मुबारक़




जिंदगी महफ़िलों सी मुबारक़ तुम्हें 
गीत यादों के तेरी सुनाता रहूँ। 
तुम ग़ज़ल की तरह यूँ ही ढलती रहो 
उम्र भर मैं तुम्हें गुनगुनाता रहूँ। 

सफल सुखद एवं भव्य जीवन की कामनाओं सहित जन्मदिन मुबारक़   !!

दिल्ली -
28 नवम्बर 2013 

शुक्रवार, 29 मार्च 2013

मेरी ख़ुशबू उसे आती होगी





: 2 9 मार्च  की मधुर स्मृतियों को समर्पित  :





जब भी तन्हाई की राहों में वो जाती होगी 
मेरी ख़ुशबू उसे आती होगी  . 


भर के सांसो  में मुझको वो पगली 
लाज से खुद में सिमट जाती होगी  .


पूछती होगी दरख्तों से पता मेरा 
रेत पर नाम कोई लिखती- मिटाती  होगी  .


ईद ,रमजान ,मुहर्रम व़ा अकीदत की नमाज 
मेरी यादों में वुजू करके निभाती होगी  .


देखती होगी जब कभी आईना जी भर 
अपनी आँखों से मेरे ख्वाब छिपाती होगी  .


तेरे हुनर पे ख़ुदा  जैसा भरोसा शालीन 
आज भी वो कही इंसान बनाती होगी  .





दिल्ली
2 9  मार्च  2 0 1 3 



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