शुक्रवार, 28 नवंबर 2014

हमारी जिन्दगी तो बस तेरी यादें बनाती हैं ....



तुम्ही हो ख्वाहिशे मेरी,तुम्ही से ख्वाब बनते हैं ,
तुम्हारे एक ईशारे पर ,हमारे ताज बनते हैं  ।
सितारे लाख मेरे साथ रहते रातभर फिर भी,
तुम्हारी रोशनी से ही तो हम महताब बनते हैं  ।


अपने घर में हम अक्सर बेघर हो ही जाते हैं ।
जहाँ बिछड़े थे हम उनसे वहीं फिर लौट आते हैं ।
भटक पाऊँ ना भूले से कभी भी राह से तेरी,
ये सारे मील के पत्थर तेरा रस्ता बताते हैं  ।


तेरी यादों का मौसम रोज ये आँखे बताती हैं,
दहकती हैं ,बरसती हैं,बसन्ती गुल खिलाती हैं ।
कोई मंजर सुहाना रास ना आता इन आँखों को,
हमारी जिन्दगी तो बस तेरी यादें बनाती हैं  ।




दिल्ली
28 नवम्बर 2014

★★★★★

2 टिप्‍पणियां:

Madan Mohan Saxena ने कहा…

बेह्तरीन अभिव्यक्ति .

Shikha awasthi ने कहा…

Bahut badiya��